Friday, 5 April 2013

यारियां


वोह कहतें हैं की आप उनसे प्यार नहीं करते
वोह कहतें हैं की आप उनको पहला दर्ज़ा नहीं देते
वोह चाहतें हैं आप उनको सराखों पर रखें
वोह कहतें हैं आप उनका दर्द महसूस नहीं करते

उनके नज़रिए से देखें तो बात तो है
अपने नज़रिए से देखें तो आप भी तो वोही चाहतें हैं
फिर यह चाहने नाचाहने की बात उठी कैसे
फिर यह बात यहाँ तक पहुंची कैसे

हर बार तनहः होकर येही बात दिल से उठती है
हर बार मन से पूछो तोह येही तो ज़हन में आता है
फिर एक बार हम तुम में खो जाएँ
फिर एक श्रुवात हो, फिर एक सवेरा हो

चलते चलते खुद से भी गुमराह हो चले
आज ऐसे, कल वैसे, कहीं खो ही गए
दिल से न चाह था की ऐसा दिन आएगा
दिल से न चाह था की इतनी तन्हाई होगी

दिल की बात है की लबों पर आती ही नहीं
मन में जो गर्दिश है, चेरेह पर आती ही नहीं
यह रास्तें किस ओरे चल पड़ें ऐसे
यह बातें यहाँ तक पहुंची कैसे

है अगर सच तो बात एक ही है
सामना उसका करने की ताकत आज भी नहीं है
उनका बुरा कभी ना चाह आपने
उनसे इकरार भी कभी ना किया आपने

मन की गहराईयों में झांकें तो लगे
मन कहता हैं में किस ओरे चलूँ अब
मंजिलें दूर हैं मगर रास्ता एक ही है
उनसे दिल जोड़ कर मंजिल मिल ही जाएगी

क्यों इतना मुश्किल है फिर वोह रास्ता
क्यों आप उनको ने देंगे एक मौका
ज़िन्दगी यह ही तो है हर बार कहती
कुछ कहना, कुछ सुन्ना, कुछ समजना ही तोह है

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